Monday, December 31, 2012

S, E And T (Science , Engineering And Technology)

In this blog we will discuss different topics of Science, Engineering and Technology. we will discuss these topics in very simple language. we will take topics which will help us to improve our life. the material may be taken from different books, sites and collected from experience of different people.

First of all we will discuss what is Science , Engineering And Technology

Science- science is a systematic and organized form of knowledge. some types of science are Physics, chemistry,biology, social science etc.

Engineering- Engineering is a science which uses scientific concepts and practical knowledge to give a real shape to science.all engineering concepts are based on science.

Technology-Technology is the application of science for practical purpose.it also use many engineering concepts.

The distinction between science, engineering and technology is not always clear. 
Science is the reasoned study of phenomena, aimed at discovering enduring principles among elements of the phenomenal world by employing formal techniques such as the scientific method.
Technologies are not usually exclusively products of science, because they have to satisfy requirements such as utility, usability and safety.
Engineering is the goal-oriented process of designing and making tools and systems to exploit natural phenomena for practical human means, often using results and techniques from science. The development of technology may draw upon many fields of knowledge, including science, engineering, mathematics, and historical knowledge, to achieve some practical result.
Technology is often a consequence of science and engineering ,although technology as a human activity precedes the two fields. For example, science might study the flow of electrons in electrical conductors, by using already existing tools and knowledge. This new found knowledge may then be used by engineers to create new tools and machines, such as semiconductor, computers, and other forms of advanced technology.

-AC


Saturday, December 29, 2012

आखिर कब तक ...

जिंदगी मौत से हारी  ...
डर लगता है ,
जाने अब हो किसकी बारी ...
सोते सोते क्या वो ,
जागा गयी इस देश को ..
बस यही दुविधा है मन की ..
क्या अब कुछ बदलाव होगा ..
या बस सब यु ही खो जायेगा ..
फिर कही कुछ ऐसा होगा ..
और देश फिर हिल जायेगा ...
जिंदगी मौत से हारी  ...
डर लगता है ,
जाने अब हो किसकी बारी ...
आज कोई अनजाना था ..
जाने कब आ जाये अपनों की बारी ...
क्या तब जागेंगे हम ...
नहीं सह सकते अब ...
शासन परशासन तुम जगोगे कब ...
तुमको तो मिली सुरक्षा पूरी ...
मगर ये जनता क्या करे बेचारी ...
जिंदगी मौत से हारी  ...
डर लगता है ,
जाने अब हो किसकी बारी ...
-AC 

मै और वो ..


मै और वो ..
मै अधेड़ उम्र इन्सान ..
वो बालक छोटा सा नादान ....
वो छोटा बच्चा ,दिल का सच्चा ...
मगर जीवन की सच्चई से अनभिज्ञ ...
मै अनुभव के पिटरो में,
भूतकाल की पीड़ा को समेटे ...
      मै और वो ..
      मै अधेड़ उम्र इन्सान ..
      वो बालक छोटा सा नादान ...
      आसमान में उमड़े बादल को देख ...
      वो भी समझा, मै भी जाना ...
      अब बारिश जम के बरसेगी ...
      वो मन में बहुत उत्साहित ,
      चहेरे पर छाई मुस्कराहट उसके ...
      मै सहमा घबराया सा ,
      मस्तक पर मेरे चिंता की रेखाये ..
मै और वो ..
मै अधेड़ उम्र इन्सान ..
वो बालक छोटा सा नादान ..
वो कागज के टुकड़े ढूडता ..
आपनी नाव बनाने को ...
मै घास फ़ुस और तिनके ढूडता ..
अपनी छत बचाने को ...
      मै और वो ..
      मै अधेड़ उम्र इन्सान ..
      वो बालक छोटा सा नादान ..
      वो खुश फिर पानी भरेगा,
      जिसमे वो आपनी नाव चलायेगा ..
      मै दुखी अगर पानी भरा अबके तो ,
      मेरा कच्चा घर ढह जायेगा ....
मै और वो ..
मै अधेड़ उम्र इन्सान ..
वो बालक छोटा सा नादान ..
-AC 

Tuesday, December 25, 2012

वो छोटे बच्चे


सूरज आसमा से गायब था ....
चारो ओर धुंध का साया था...
गरम कपड़ो में लिपटे हुए ...
चाय की चुस्की लेकर ,
जैसे ही कुछ गरम पकोड़े खाए ....
खिड़की से बहार,सड़क के दुसरे किनारे पर ..
कुछ धूंदले से हिलते हुए चेहरे नजर आए ...
आँखों को गड़ाकर ,धुंध के पर्दों के पार झाका ...

उस कडकती सर्दी में कुछ छोटे बच्चे ...
फटे हाल अर्ध नग्न अवस्था में ...
नंगे पाँव ,कचरे के ढेर पर ...
पीठ पर कचरे का बोरा ...
हाथ कचरे के ढेर से कचरा बिनते ...
ठंडी हवाओ से जूझते ..
दो वक़्त की रोटी की तलाश में ...
दिन भर सड़क पर भटकते वो छोटे बच्चे ...

साँझ को ऑफिस से वापस आते ..
घर को जाने की जल्दी में  ..
फिर सड़क के किनारे फूटपाथ पर ...
एकाएक अपनी ओर धयान खीचते ...
वही कचरा बिनने वाले छोटे बच्चे ...

शिक्षा से दूर ,सड़क पर भटकने को मजबूर ..
विकास के वादों को ठेंगा दिखाते ...
सर्वशिक्षा अभयान को भी झूठा बताते ...
दिनभर कचरे के ढेर पर बिताकर ....
साँझ को सड़क के किनरे बने फूटपाथ पर ...
खुले आसमान के साये में ...
सिकुड़ कर एक छोटे से कम्बल के टुकड़े में ...
सोने की कोशिस करते,सुबहे के इन्तजार में ...
सड़क पर रात बिताने को मजबूर वो छोटे बच्चे ...

दिन भर की थकान से चूर ..
नाईट बल्ब की हलकी रोशनी में ...
सोने के लिये जैसे ही आंखे बंद की ...
फिर से आँखों के सामने आते ...
कचरा बिनने के लिए भटकते वो छोटे बच्चे ..
अंतरात्मा को झंझोड़ते, सोचने पर मजबूर करते ..
किस जात के है ये, क्या धर्म है इनका ...
क्यों नहीं कोई नेता आता ....
इनके लिये कोई आरक्षण क्यों नहीं मागता ...
कोई इन्हें वोट बैंक क्यों नहीं बनाता  ....
क्यों नहीं किसी को याद आते ...
इसी देश के नागरिक वो छोटे बच्चे ...

-AC

Saturday, December 22, 2012

एक सवाल

एक बार फिर जनता सडको पर है ...
एक बार फिर दिलो में आक्रोश  है ...
मुद्दा अलग है ,पर सवाल वही है ...
आखिर हो क्या रहा है ...
आखिर हमारी सरकार कर क्या रही है ...
किस मुह से ये नेता वोट मागते है ....
जनता को शौक नहीं है सडको पर आने का ....
वो तो चैन से अपने घरो मे रहना चाहती है ..
मगर वो चैन है कहा ....

हर बार, बार बार ,जनता कब तक चिलाएगी ...
क्या हमारा शासन प्रसाशन कभी जागेगा ...
क्या उन्हें देश की कोई चिंता है ...
हर बार एक नये आश्वाशन के साथ ...
जनता अपने घर चली जाएगी ...
समाधान के इंतजार में ....
एक सवाल के साथ ...
आखिर कब तक ...
कब तक यही चलता रहेगा ?????

-AC

Sunday, December 16, 2012

जिंदगी एक कहानी...

जिंदगी एक कहानी...
लहरों मे फसी  कश्ती...
 उससे  टकराता पानी ...
जिंदगी एक कहानी।
             मंजिल किनारा , साहरा पानी...
             बीच मझदार डुबाता पानी ...
             लहरों मे फसी  कश्ती...
              उस से  टकराता पानी ...
लहरे आती है , फिर वही समाजाती है...
उनसे लड़ना और आगे बढ़ना ..
जिंदगी की यही रवानी ..
जिंदगी एक कहानी।
             हमसफ़र है तेरा कोई ...
             तो तू  बड़ा खुसनसीब है....
            है तन्हा तो ये तेरा नसीब ..
           पर तुझको भी ये है जिंदगी बितानी...
           जिंदगी एक कहानी।
जाने कौनसी लहर उठकर  ये कश्ती डूबा दे...
जाने कौनसी लहर मोतियो की बौछार ला दे ..
बस यही सोच कर हर लहर है अपनानी ..
 जिंदगी एक कहानी।

लहरों मे फशी कश्ति..
 उस से  टकराता पानी ...
जिंदगी एक कहानी।


AC