Sunday, February 24, 2013

blast, दर्द -ए -लाचारी

फिर कही से धमाके की आयी है आवाज ...
देखो फिर नींद से जागे नेता जी है आज ...
कौन मरा ... कँहा मरा...कितने मरे ..
क्यों तुम यु हाय तोबा मचाते हो… 
क्यों नहीं अपने घर में चुप बैठ जाते हो ...
जाँच कमेटी बना दी है, वो अपना काम करेगी ...
क्यों तू अब तक यहाँ खड़ा है ..
क्या तेरा भी कोई यहाँ मरा है ....
ले पकड तीन लाख तू भी और घर में आराम कर ...
नेता जी आये है दौरे पर,  सब संभल लेगे ...
इस बार फिर कोई नया बयान देगे ...
पडोसी मुल्क का हाथ लगता ...
आतंकवाद का कोई धर्म नहीं ..
आप सयंम बनाये रखे ...
हम जवाब देगे ...
दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी ...
अब ऐसे हमले बर्दाश नहीं होगे ...
ठीक है या कोई नया बयान भी दे ...
कृपया मिडिया मुद्दे को हवा ना दे  ...
हर घटना को रोका नहीं जा सकता ...
जाँच जरी है, आप पर्तीक्षा करे ...
कुछ दिन जनता चिलाएगी ...
नेता जी की नींद उड़ाएगी ...
फिर नए धमके के डर को समेटे ...
सब भूल जाएगी ...
नेता जी भी फिर से  सो जायेगे ...
नये धमाके पर फिर सब याद आयेगे ....
फिर आसू नयी आँखों में आपना घर बनयेगे ..
फिर जाने किसके अपने ,अपनों से दूर जायेगे ...
सरकार किसकी भी हो चाहे ..
नेता जी मुआवजा देने जरुर आयेगे ...

Tuesday, February 12, 2013

जिंदगी की दौड़

दौड़ में दुनिया की ,
          सरपट दौड़ने लगे सभी ...
पूछने की एक सवाल,
          जरा फुर्सत ना मिली ..
के हम दौड़ क्यों रहे है, 
         जाना है कहा, है मंजिल किधर ..
क्या है हसरते दिल की ,
         क्या है ख्वाहिसे हमारी ...
दौड़ में दुनिया की,
        सरपट दौड़ने लगे सभी ...
एक पल ठहर कर कही,
        क्या खुद से पुछा है कभी ...
निकला था घर से,
        क्या तु है आज भी वही ..
पहचान खुद की भीड़ मे,
        खोने लगे है कही ..
खुद को ही जानने का,
       कभी वक़्त मिला नहीं ..
दौड़ में दुनिया की,
       सरपट दौड़ने लगे सभी ...

     -AC