Friday, August 25, 2017

Train rail or derailed

कोशिश .....An Effort by Ankush Chauhan
Train rail or derailed

छुक छुक छुक रेलगाड़ी।
दौड़ी दौड़ी सरपट दौड़ी रेलगाड़ी।।
खुशियो की ये रेलगाड़ी , रेलगाड़ी।
दौड़ी दौड़ी सरपट दौड़ी रेलगाड़ी।।
अपनो को ये अपनो से मिलती।
खुशियो को ये पास लाती।।
छुक छुक करती जाती।
दूर दूर की सैर कराती।।
अहा ये क्या क्यो रोक गयी ये रेलगाड़ी।
बिखरे डब्बे जैसे ताश के पत्ते।।
लहू लुहान इतने क्यो सब हुए।
रोते बच्चे दर्द से करहाते लोग।।
किसकी ये गलती किसका है दोष।
मंत्री , अफसर या कर्मचारी।
किसकी  है  ये  जिम्मेदारी।।
है भूल या कोई साज़िश।
या तंत्र की लापरवाही।।
कौन सुनेगा किसे सुनाये।
दर्द अब अपना किसे बताये।
जाँच होगी , मुआवज़ा मिलेगा।
लेकिन बिछड़ा अपना वो कहा मिलेगा।।
प्रभु तेरे भरोसे थी एक उम्मीद जगाई।
तूने भी प्रभु भरोसे छोड़ दी रेल भाई।।
माना तूने जी जान लगाई।
मगर न बदल सका स्तिथि तो।
तो किस काम की वो है

-AC

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