Thursday, September 07, 2017

स्वच्छ भारत अभियान: क्या स्वच्छ हुआ भारत ?

कोशिश .....An Effort by Ankush Chauhan
स्वच्छ भारत अभियान.

यू तो 2 अक्टूबर को हर वर्ष गांधी जयंती मनाई जाती है मगर 2 अक्टूबर 2014 कुछ खास हो गयी क्योकि उस दिन देश के नये बने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने एक अभियान की घोषणा की स्वच्छ भारत अभियान... स्वच्छ भारत अभियान एक उम्मीद बनकर आया के अब हमारा देश भी स्वच्छ बनेगा । देश मे एक माहौल बना लोग गंदगी से मुंह चुराने के बजाए उसको साफ करने के लिये आगे आये प्रधानमंत्री जी के आह्वान पर पूरा देश चल दिया शहर, गाँव, कस्बो, गली और मोहल्लों स्वच्छ्ता की समितियां बनने लगी । काम भी करने लगी सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं ने भी अपनी भागीदारी निभाई और नेता, अभिनेता, मन्त्री , संतरी सभी झाड़ू लेकर सड़को पर आ गए । कुछ गंदगी को साफ करने को तो कुछ फोटो खिंचाने को खैर जो भी हो एक माहौल तो बना ही । मगर क्या सच मे स्वच्छ बना भारत ? आज भी वही गंदगी के ढेर , बड़े बड़े कूड़े के मैदान , नदियों नालो का प्रदूषण किसी से छुपा नही। सरकार की स्वछता की मुहिम भी अब बस स्वच्छ भारत से खुले में शौच मुक्त भारत तक सीमित हो गयी। क्योकि उन्हें भी यही आसान दिखा। क्योकि कुछ तो हो न दिखाने के लिये हमारे सरकारी बाबू को ऊपर प्रधानमंत्री जी को भी तो बताना है के कितने सफल रहा हमारा अभियान।

सरकार भी मानती है के देश मे गंदगी के कारण अनेक बीमारियों के कारण स्वास्थ सेवाओ पर करोड़ो का खर्च करना पड़ता है। साथ ही who की एक रिपोर्ट के अनुसार गंदगी के कारण देश के प्रत्येक नागरिक को 6500 रुपये प्रति वर्ष का अतिरिक्त खर्च झेलना पड़ता है। भारत सरकार द्वारा जारी आकड़ो के अनुसार वर्ष 2016 में डेंगू के 129166 मामले सामने आए अकेले देल्ही में ही 4431 मामले थे। ये सब बातें और अकड़े ये समझने के लिये काफी है कि देश मे स्वच्छ्ता की कितनी जरूरत है। मगर ये सिर्फ सड़को पर झाड़ू लगाने या शौचालय बनवा देने से संभव नही शौचालय एक पक्ष है वो हर घर और संस्थानों में होना चाहिये । मगर साथ ही जरूरी है कूड़े कचरे की समस्या जो शहर और गाँव मे कूड़े के पहाड़ लगे है उनके निस्तारण की। सड़कों और गलियों को साफ़ करने में तो जनता ने आपका सहयोग किया मगर गाँव शहर की सरकारी मशीनरी को भी जागना होगा कही कही तो कूड़ा डालने के लिये उचित व्यवस्था नही कोई डस्टबिन या कूड़े दान तो छोड़ो कोई बस्ती और रिहायशी इलाकों से दूर कूड़े को डालने की जगह ही नही खुद सरकारी गाड़ियों को कूड़ा नदी नालों या कही भी किसी खाली मैदान में डालते देखा जाता है। कूड़े के निस्तारण की कोई तकनीक और व्यवस्था ही नही। देश के इतने बड़े बड़े संस्थान इतना बड़ा लोकतंत्र अगर कूड़ा निस्तारण का कोई आधुनिक तरीका नही निकल सकता या कोई व्यवस्था नही कर सकता तो स्वच्छ भारत का सपना एक सपना ही रहने वाला है। देल्ही जो देश की राजधानी है वहाँ भी स्थित बहुत बुरी है कूड़े के पहाड़ के कारण लोगो का मरना क्या ये राजधानी की खबर है सुनकर भी अजीब लगता है। अगर वहाँ ये स्तिथ है तो देश के दूर दराज़ के इलाकों में क्या होगा। कैसे हम हमारे देश को विदेशों की तरह साफ सुथरा और सुंदर बना पाएंगे। क्या ये सिर्फ सपना रहने वाला है। या सरकारी बाबुओ के आकड़ो में एक सफल योजना। और अकड़े भी वो जो बंद कमरों में बनते है।

नई सरकार और नए प्रधानमंत्री ने एक उमीद जगाई थी नए भारत की मगर ऐसे तो भारत नया नही बन पाएगा और ना ही सिर्फ शौचालय बनाने से स्वच्छ भारत भी नही बन पाएगा। 
सरकार और सरकारी बाबुओ को प्रधानमंत्री के मन की बात समझनी चाहिये और स्वच्छ भारत अभियान का सही मतलब और वही सही स्वच्छ भारत अभियान सही में कुछ परिवर्तन ला सकता है साथ में सरकारी योजनाओं में सही ढंग से उसके लिये कार्ये करना होगा। क्योकि पहला चरण जनता को स्वछता का मतलब समझना था और जनता को साथ जोड़ना था वो अब हो चुका है अब आपको अगले पड़ाव पर जाना होगा । नही तो ऐसे कैसे होगा स्वच्छ भारत अभियान पूरा।

-AC

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