Friday, September 29, 2017

Economy of India,भारत की अर्थव्यवस्था

कोशिश .....An Effort by Ankush Chauhan
भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है चीन और अमेरिका ही सिर्फ हमसे आगे है

 इसका मतलब ये नही हम बहुत अमीर  देश है। आज भी यहाँ गरीबी बहुत है सरकारी आकड़ो के अनुसार ही देश मे 22-23% लोग गरीबी रेखा से निचे है मगर वास्तव में तो आधे से ज्यादा लोग गरीब ही है। क्योंकि सरकार तो 32 रुपये से ज्यादा वाले को गरीब नही मानती। चलो जो भी हो सरकारी अकड़ा हम अर्थव्यवस्था पर बात करते है । 
वैसे तो स्कूलों में पढ़ाया जाता है के हमारा देश कृषि प्रधान देश है मगर देश की अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान 17-18% पर पहुँच गया है। हमारे सकल घरेलू उत्पाद(GDP) मे आधे से ज्यादा हिस्सा सर्विस सेक्टर ही है। ऐसा नही के कुछ सालों में कृर्षि सेक्टर की भगीदारी घाटी है ये तो आज़ादी के बाद से साल दर साल घटती ही आ रही है। क्योकि किसान तो सिर्फ राजनीतिक मुद्दा ही बन कर रह गया है। किसान और कृषि के विकास के लिये ज्यादा काम हुआ ही नही । और दूसरा कारण ये भी है के बाकी क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ गए। मगर कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रो का विकास जरूरी है क्योकि खाद्य महगाई इसी पर निर्भर है। और ये महंगाई दर का वो हिस्सा है जो सीधे जनता को प्रभावित करता है।

हमारे देश की GDP आज विश्व मे तीसरे स्थान पर पहुँच गयी है और वृद्धि दर 5-6% पर है । वैसे ये उम्मीद से काफी कम है क्योंकि आकलन थोड़ा ज्यादा था । मगर इसका मतलब ये नही की हम मंदी के दौर से गुजर रहे है। मगर 2014 से जो गति पकड़ी थी वो थोड़ा कम हुई है। वैसे तो इसके बहुत से कारण है मगर मुख्य कारणों में हम नोट बंदी को गिन सकते है। मगर इसका मतलब ये नही के हम नोटबंदी को गलत ठहरा रहे है। बल्कि ये तो उस दवाई की तरह है जो बीमारी में दी जाती है उससे कभी कुछ कमजोरी महसूस दे सकती है मगर वो आपके भले के लिये है। क्या आपको पता है देश की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा रियल स्टेट है और नोट बंदी का सबसे बड़ा असर भी यही हुआ है सबसे ज्यादा कालधन और भ्रस्टाचार भी यही है। वैसे तो देश मे 2011 में इन मुद्दों पर काफी हल्ला हुआ था मगर जब कुछ कार्येवाहि हुई तो सब हिल गए। क्या रियल स्टेट में कालाधन कैसे? ये कौन नही जानता के यहाँ हर रजिस्ट्री मार्किट वैल्यू से कम पर होती है। मतलब आप 50 लाख के घर की रजिस्ट्री 30 लाख में करते है देते तो 50 लाख ही कागज में बाकी 30 अंडर टेबल। क्यो थोड़ा टेक्स बचाने के लिये थोड़ा इनकम छुपाने के लिये बाकी जो ईमानदारी चाहते भी है उन्हें डीलर के दबाव में ऐसा करना पड़ता था क्योंकि डीलर भी अपनी इनकम कम करके दिखा रहा है। इतने बड़े काले धंदे पर चोट लगी तो कुछ तो असर होगा। जिनमे थोड़ा बहुत ईमानदारी थी वो तो अब भी कर रहे है मगर जिन्हें बईमानी की ज्यादा आदत थी वो तोड़ा ज्यादा ठंडे है। वैसे ये नोटबन्दी अच्छी है या बुरी इसके तो सबके अपने आकलन है। कोई 99% नोट जमा होने को ही बुरा मान रहे है मगर उस का क्या जो नकली नोट बाहर हो गए। वो भी तो देश की अर्थव्यवस्था को खराब कर रहे थे। खैर जो भी हो मगर नोटबन्दी और उसके आसपास बने कई बैंकिंग नियम भ्रस्टाचार पर लगाम और कालेधन को नियंत्रण करने में सहायक है। मगर ये 2000 का नोट सही नही लगा उस समय नोट की कमी को पूरा करने के लिये सही था मगर अब इसको धीरे धीरे बैंड कर देना चाहिये।
वैसे हमारे देश मे 5000 और 10000 के नोट भी जब चला करते थे जब पूरे पुर गाँव के पास इतने पैसे नही होते होंगे 1978 में भी एक नोटबन्दी मे बंद हुए थे ये।
वैसे बात अर्थव्यवस्था की कर रहे थे तो नोटबन्दी का जिक्र जरूरी था क्योकि इस पर काफी हल्ला हो रहा था। वैसे तो GDP ग्रोथ  2012-13 में ये 4.5% और 2013-14 में भी 4.75% के आस पास थी। तब कोई नोटबन्दी भी नही थी।

देश की अर्थव्यवस्था में GDP के साथ ही महंगाई दर भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ये जनता की खरीदने की क्षमता से जुड़ी है और सरकार को नीति निर्धारण एक कारक है। वैसे आकड़ो के अनुसार इसका नियंत्रण में होना भी अच्छा संकेत है महगाई दर 3-4 % से कम ही है। इसका मतलब ये नही के चीज़े पहले की तुलना में सस्ती हो गयी मगर दाम बढ़ने की दर कम हो गयी। साथ ही इसका आपको इनकम से गहरा संबंध है यदि आपकी इनकम 15% से बढ़ती है और महगाई 5 % से तो इसका मतलब आप ग्रोथ कर रहे है और अर्थव्यवस्था आपके लिये अच्छी है। लेकिन इसका उलट बुरी स्तिथि है। क्योंकि अगर आपकी पर्चेज पावर (खरीदने की क्षमता) बढ़ रही है तो किसी चीज़ के दाम में उतार चढ़ाव मायने नही रखते।

साथ ही देश की अर्थव्यवस्था के लिये GST भी लंबे समय मे अच्छा साबित होने वाला है। बईमानों को यहाँ भी दिक्कत होने वाली है क्योंकि इसमें टेक्स चोरी थोड़ा मुश्किल होगा। फ़र्ज़ी बिल भी मुश्किल होगा क्योकि सब ऑनलाइन होगा। तो फ़र्ज़ी बिल पकड़ना आसान होगा। साथ ही टेक्स चोरी भी कम होगी जो देश का रेवन्यू बढ़ाने में सहायक होगा। 
खैर अपनी चर्चा को वापस अर्थव्यवस्था पर आते है । अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिये कृषि क्षेत्र का विकास टी जरूरी है ही साथ ही इंडस्ट्रियल ग्रोथ भी जरूरी है इसमें मुख्य रूप से माइनिंग , मैनुफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिसिटी , गैस प्रोडक्शन आदि आते है। और आज के समय मे अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा घटक सर्विस सेक्टर जिसमे ट्रांसपोर्ट, व्यपार, होटल, रियल स्टेट आदि प्रमुख है और सीधी भाषा मे कहे तो अगर लोगो के पास पैसा आएगा तो ये ज्यादा बढेगा । मगर अर्थव्यवस्था के बढ़ने में इस बात का भी ध्यान जरुरी है के गरीब जनता और मिडल और लोअर मिडिल क्लास की भागेदारी भी इसमें हो। ऐसा न हो के अमीर और गरीब के बीच की खाई ज्यादा बढ़ जाये।
वैसे तो अर्थव्यवस्था और भी जटिल है जिसमे अगर फल सब्जियां बाज़ार में सस्ती हो जाये तो किसान दुखी और महंगी हो जाये तो खरीदार दुखी। तो इसका संतुलन जो थोड़ा मुश्किल भी मगर बनाना जरूरी है। जितना मैंने अर्थव्यवस्था को किताबो में पढ़ा और समझा आपको सरल भाषा मे समझाने का प्रयास किया। अगर कोई सलाह या शिकायत हो तो जरूर लिखे।


-AC

1 comment:

  1. Ankush - Good for " Kosish " Everyone have to take such steps to aware people.. but we need to analysis development as we are measuring in our monthly budget than only you are can find this facts you are showing is right and really this is good for us.

    but really KOSISH is very steps taken by you. Welldone bro..

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