Sunday, November 19, 2017

वीरो के बलिदानों को समझे

वीरो के बलिदानों को समझे

जो  तन   मन  से  हुए  गुलाम ।
वो वीरो के बलिदानों को क्या समझेगे।।
स्वीकार की जिन्होंने दस्ता मुगलो की ।
वो पद्मावती के जौहर को क्या समझेगे।।
चंद रुपियो में बिकने वाले।
शौर्ये और स्वभिमान को क्या समझेगे।।
विरोधी नही किसी नेता और अभिनेता के।
मगर वीरो के बलिदानों का अपमान नही सहेंगे।।
वीरो के लहू से सिंचित ये भारत भूमि।
इस भूमि के वीरो का उपहास नही सहेंगे।।
पुरखो ने तुम्हारे झुकाकर सर अपना सुख बचाया।
वीरो ने कटा कर सर, अपना स्वाभिमान बचाया।।
रक्त शिराओ में हमारी भी बहता है उन वीरो का।
स्वाभिमान की रक्षा को प्राण न्यौछावर से भी नही डरेंगे।।
चंद रुपयों की खातिर जो माँ को भी गली दे देते है।
क्या वो अब हमें इतिहास का पाठ पढ़ाएंगे।।
किताबो के पन्नो की मोहताज नही वीरो की गाथायें।
राष्ट्रभक्तो के रोम रोम में बसी साहस अदम्य की शौर्ये कथाएँ।।
राष्ट्र की खातिर अपने बेटों को कुर्बान करने वाली माताओ की गौरव गाथाएँ।
सत्ता की खातिर अपने बापो को नजरबंद करने वालो के वंसज क्या समझेगे।।
माना के तुमने खूब पसीना बहा एक फ़िल्म बनाने में।
मगर उन वीरो ने अपना रक्त बहा ये राष्ट्र बनाने में।
चंद रुपयों की खातिर घटिया काम ना करो।
वीरो का इस भारत भूमि के तुम अपमान ना करो।

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