Monday, November 08, 2010

नवयुग

"नव  भारत  के  निर्माण  को …
नवयुग   के आगाज   को …
अब  कुछ  कर  दिखाना  है …
फिर  एक  धर्म  युद्ध  अब  लड़ना  है…
फिर एक बार  अपने   है विरुद्ध  हमारे …
इस  बार बिना  हथियार  ..एक नया  महाभारत  होना  है…
स्वयं  अर्जुन स्वयं  बन  कृषण, गीता  को अब दोहोराना  है…
नव भारत के निर्माण को…
नवयुग  के आगाज को…
अब कुछ कर दिखाना है…
तुम  भी  चलो , हम  भी चले ..ना  तुम  रुको , ना  हम थके …
मुश्किल  आएगी  पर  ना हम रुके …
 ववधाये हो , बाधाये   हो , सर  कटे , पर ना झुके …
अब हमको  बढ़ते  जाना  है…
दुनिया  को अब दिखाना है…
नव  भारत  के  निर्माण  को …
नवयुग  के आगाज   को …
अब  कुछ  कर  दिखाना  है …
"
AC

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