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भारतीय दर्शन और आधुनिक विज्ञान

कोशिश .....An Effort by Ankush Chauhan भारतीय दर्शन विश्व के प्राचीनतम दर्शनो में से एक है इसमें अनेक वैज्ञानिक सिंद्धान्तो को प्रतिपादि...

कैसे बनेगा आत्मनिर्भर भारत।

कोशिश .....An Effort by Ankush Chauhan
आज सरकार हो या जनता , आम हो या खास हर कोई आत्मनिर्भर भारत की बात कर रहा है। और पड़ोसी देश चीन से बढ़ी तनातनी ने आत्मनिर्भर भारत की इस आवाज को और बल दिया है। चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे अधिक जनसँख्या वाला देश भारत ही है। इसलिये भारत एक बहुत बड़ा बाजार भी है। मगर अपने देश की इस आबादी को सिर्फ बाजार बना कर रखना देश की अर्थव्यवस्था के लिये अच्छा नही है । देश हित इसी में है के देश की इस आबादी को अपनी ताकत बना कर देश मे उत्पादन को बढ़ाया जाय जिससे देश मे विदेशो से होने वाले आयात को कम किया जाये ताकि हम अपने देश की जरूरतों के लिए चीन या किसी अन्य देश पर निर्भर न रहे साथ ही देश मे रोजगार को भी बढ़ाया जा सके और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण हो सके।
मगर ये जितना आसान दिखता है क्या उतना ही आसान है?  आत्मनिर्भर भारत का सपना ऐसा सपना है जिसे सिर्फ सरकार पूरा नही कर सकती ना ही सिर्फ जनता अकेले आत्मनिर्भर भारत बना सकती है। आत्मनिर्भर भारत का सपना एक ऐसा सपना है जिसे देश की जनता और सरकार दोनों के सहयोग से चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा सकता है।
आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरे करने के लिए पहला कदम तो यही है कि देश की जनता जहाँ तक सम्भव हो स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करे। साथ ही व्यापारी वर्ग को भी इसमें सहयोग करते हुए अच्छे स्वदेशी उत्पादों को ग्राहकों तक पहुचाने में सहयोग करना चाहिये।  ग्रहक और व्यपारियो दोनों को चाहिए के वो थोड़े से फायदे के लिए विदेशी खासकर चीनी उत्पाद को ना अपनाये। अगर हम देश मे बने उत्पादों को बढ़ावा देगे तो मांग बढ़ने से धीरे धीरे उत्पादन बढ़ने के साथ उनकी कीमतों में भी कमी आ सकती है। साथ ही विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी तथा देश मे उत्पादन बढ़ने से रोजगार के अवसर भी बढेगे तथा ये आत्मनिर्भर भारत की और एक कदम होगा।
दूसरा कदम सरकार को उठाना होगा सरकार को चाहिए कि सरकार देश की छोटी बड़ी कंपनियों को बढ़ावा दे उन्हें फलने फूलने के अवसर प्रदान करे।  गांव, देहात , कस्बे  और शहर में मौजूद छोटे छोटे उद्योगों और व्यपार को बाजार मुहैया करना होगा। जिला स्तर पर व्यपार सहयोग केंद्र बनने चाहिए जो नये और छोटे व्यपारियो / उधोगो को तकनीकी और उनके क्षेत्र में उपलब्ध उधोगो के अवसर के साथ, व्यपार के पंजीकरण, आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के साथ कच्चे उत्पाद से लेकर , बाजार तक कि जानकारी उपलब्ध कराए।
एक राष्ट्रीय स्तर का डेटा बेस बने जो अलग अलग उत्पादों की देश - विदेश में मांग और भारत मे उसके उत्पादन का स्तर बात सके। ताकि मांग और उत्पादन के बीच के अन्तर को समझ कर सही अवसर को पहचाना जा सके।
विदेश से आयात होने वाले उत्पादों के देश मे निर्माण के लिए उचित व्यवस्था बनाई जाय देश मे छोटे स्तर पर बन सकने वाले उत्पादों के लिए जिला स्तर पर प्रशिक्षण की व्यवस्था हो ताकि लोग उन रोजगारो को चुन सके।
देश के बड़े उधोगपतियों को भी आत्मनिर्भर भारत मे अपना सहयोग करना होगा उन्हें सिर्फ बड़े मुनाफे के उधोगो में ही निवेश न कर ऐसे उधोग भी प्रारंभ करने चाहिए जो देश में आयात को घटाने में मदद कर सके ।
साथ ही उन्हें देश के छोटे छोटे कुटीर उधोगो में भी अपना निवेश करना चाहिये ताकि देश के दूर दराज के इलाकों में होने वाले हस्तशिल्प , कुटीर उद्योगों या छोटे स्तर के उधोगो को भी पनपने का मौका मिले।
हमारे देश मे अपार संभावना है बस सही मार्गदर्शन और सहयोग की जरूरत है। देश का हर नागरिक एक साथ आकर आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा कर सकता है। आज इस आपदा को अवसर में बदले का मौका हमारे पास है आज देश के पास बहुत बड़ा मौका है और माहौल भी है तो हमे इसका सदुपयोग करना चाहिए। इसमे राजनीति से ऊपर उठकर और धर्म , जाति सम्प्रदाय की दीवारों से परे एक भारत के रूप में एक दूसरे का सहयोग करना होगा।
लोकल के लिए वोकल होना होगा एक दूसरे के अच्छे उत्पादों का प्रचार करना होगा और देश के आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा करना होगा।
-AC

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