17/1/18

Know EPF, Employees' Provident Fund

कोशिश .....An Effort by Ankush Chauhan
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन सरकारी और गैरसरकारी दोनों कर्मचारियों के भविष्य को सुनिश्चित करने के उदेश्य से बना एक संगठन है।


कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की स्थापना 15 नवम्बर ,1951 को कारखानों और अन्य संस्थानों में कार्यरत संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए की गयी थी | कर्मचारी भविष्य निधि कार्यालय के पास उन सभी कार्यालयों और कारखानों को रजिस्टर करना पड़ता है जहाँ पर 20 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं |  तथा आज के समय मे अगर आपका बेसिक 15000 से कम है तो EPF में शामिल होना अनिवार्य है। जब भी आप किसी  ऐसी संस्था में काम करते है जो EPFO के साथ पंजीकृत है | और आपकी तनख्वाह 15000 से कम है तब आपकी तनख्वाह का 12% काट कर epf में जमा किया जाता है, और साथ ही आपकी तनख्वाह का 12% जिस कंपनी या संस्था में आप काम करते हैं उनको  EPFO में जमा कराना पड़ता है | मगर यहाँ पर एक बात गौर करने वाली है की आपकी तनख्वाह से कटा हुआ 12% तो पूरा आपके EPF खाते में चला जाता है | लेकिन आपके कंपनी द्वारा 3.67% EPF में और 8.33% EPS (Employee Pension Scheme) में चला जाता है | और माना यदि आपकी बेसिक 10000 है तो आपकी कंपनी या नियोक्ता द्वारा 10000 का 8.33% यानि की 833 रु EPS में जमा किया जायेगा बाकी 367 रु EPF में चला जायेगा | यानी कुल 1200+367= 1567 EPF में और 833 EPS में जायेगा।
और  आप कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के सदस्य होते है अतः आप  कभी भी प्रोविडेंट फंड या पीएफ बैलेंस जान सकते हैं। इसके लिए आपको अपनी कंपनी या किसी अन्य व्यक्ति की जरुरत  नहीं , न ही कम्पनी  द्वारा साल के आखिर में पासबुक की कॉपी देने का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा। आप जब चाहे अपना पीएफ बैलेंस की जांच कर सकते हैं। इसके लिए कर्मचारी चाहें तो EPFO की वेबसाइट, ऐप, एसएमएस या मिस कॉल देकर अपना पीएफ का बैलेंस जान सकते हैं। एपफओ की वेबसाइट से अपना बेलेन्स जाने का तरीका बहुत आसान है 
सबसे पहले epfindia.gov.in वेबसाइट पर जाएं। 

5/1/18

यथा दृष्टि तथा सृष्टि

कोशिश .....An Effort by Ankush Chauhan

जीवन जीने का वास्तविक तरीका यदि हम जान ले तो जीवन अपने आप सुन्दर हो जाएगा।
हम अक्सर देखते है कोई खुश है कोई दुःखी , कोई हँस रहा है कोई रो रहा है। दुनिया तो वही है एक जैसी परिस्तिथियों में भी किसी को दुःख तो किसी को सुख ?

वेदों में एक बहुत सुन्दर वाक्य है

"यथा दृष्टि तथा सृष्टि"
और यह हमारे जीवन का बहुत बड़ा वाक्य है। 

हमारी दृष्टि ही वास्तव में हमारी सृष्टि का निर्माण करती है। और हमारी दृष्टि का निर्माण या तो हमारे जीवन के पूर्व संस्कारो से होता है या हम अपनी इच्छा शक्ति से करते है।



28/12/17

Arunachalam Muruganantham, the first man to wear a sanitary pad. Padman

कोशिश .....An Effort by Ankush Chauhan
Arunachalam Muruganantham, the first man to wear a sanitary pad. Padman



अरुणाचलम मुरुगनाथं , पहला आदमी जिसने सैनिटरी पैड पहना ।  और कहलाया पैडमैन
हा दोस्तो आपने अक्षय कुमार की आने वाली फिल्म पैडमैन के बारे में तो सुना होगा जो 26 जनवरी को सिनेमाघरों में आ जायेगी। मगर क्या आप जानते है ये फ़िल्म सच्ची कहानी पर आधारित है ..ये कहानी है। हमारे देश के एक सामाजिक उधोगपति अरुणाचलम मुरुगनाथं जी की।
ये पहले आदमी है जिन्होंने सैनिटरी पैड को पहना । लोगो ने इन्हें पागल कहा मगर आज इनके पास पदमश्री पुरस्कार है और इनकी कहानी पर फ़िल्म बन चुकी है। इन्हें 14 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़नी पड़ी। इन्होंने खेतो में मजदूरी की और फिर ये इंसान 2014 में टाइम मैगजीन में छप गया। 2016 में इन्हें पदमश्री मिला।

18/12/17

Right to education, शिक्षा का अधिकार

कोशिश .....An Effort by Ankush Chauhan
Right to education, शिक्षा का अधिकार

शिक्षा जो हर सभ्य समाज की मुख्य जरूरत है ताकि वो समाज वास्तविक तरक्की , आर्थिक के साथ वैचारिक तरक्की कर सके।
परन्तु आज अगर हम अपने देश में शिक्षा की स्तिथि को देखते तो लगता नही के हमारी सरकारों ने कभी इसे गंभीरता से लिया। जितना देश आगे की तरफ बढ़ रहा है शिक्षा वयवस्था उतनी पीछे की तरफ जा रही है। एक तरफ वो प्राइवेट स्कूल है जो फीस के नाम पर बच्चे के माँ बाप का खून भी चूस जाये। तो दूसरी ओर वो सरकारी स्कूल है जहाँ शिक्षा का बस नाम ही रह गया है। 
संविधान के छियासिवे संसोधन अधिनियम 2002 ने भारत के संविधान में निहित अनुच्छेद 21A में मौलिक अधिकार के रूप में 6  से 14 वर्ष के सभी बच्चो के लिये मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान किया तो 2009में शिक्षा का अधिकार कानून बनाया गया जिसमें निशुल्क और अनिवार्य बल शिक्षा अधिनियम 2009 में बच्चो का अधिकार जो 21A के तहत एकसमान गुणवक्ता वाली पुर्णकालिन प्राम्भिक शिक्षा प्रत्येक बच्चे का अधिकार है RTE अधिनियम जो 1 अप्रैल 2010 को लागू हुआ जिसमें निशुल्क और अनिवार्य शब्द जोड़ दिया गया।
इतना कुछ हुआ मगर कागजो में क्योकि सिर्फ कानून बनाने से क्या शिक्षा मिल गयी। जब हमारे देश के सरकारी स्कूलों में शिक्षक ही नही तो शिक्षा कहाँ से होगी सरकारी आकड़ो के अनुसार देश के प्राइमरी स्कूलों में लगभग 9 लाख शिक्षकों की कमी है । और ये कमी देश के लगभग हर राज्य में है।
और जो शिक्षक है भी उनमे कुछ  तो पढ़ाना नही चाहते । तो किसी को अन्य सरकारी कामो जैसे जनगणना , मतदान और मतगणना में लगा दिया जाता है। इसलिय सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या भी घटती जा रही है।

13/12/17

Reservation in India,आरक्षण कितना सही कितना गलत ?

कोशिश .....An Effort by Ankush Chauhan


आरक्षण आज देश मे एक ज्वलंत मुद्दा बन रहा है आज देश के अलग अलग क्षत्रो में लोग आरक्षण के लिये आंदोलन करते दिख रहे है अजीब स्तिथि है देश की जहाँ लोग आगे आने के लिये काम करने के बजाय पिछड़ा बनने के लिये आंदोलन कर रहे है। कुछ राजनीतिक दल आज आरक्षण को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे है। देश मे जगह जगह चलने वाले आंदोलन काफी हद्द तक तो राजनीतिक दलों के इशारो पर ही चलते है।
आरक्षण एक ऐसी दोधारी तलवार बन गया है जो इलेक्शन जीताता भी है और हरवाता भी है अजीब है ना जो एक समुदाय के उत्थान के लिये बना था आज राजनीत का मुद्दा बन गया है। जिसका मकसद सिर्फ अपनी राजनीतिक रोटियां सेकना है । किसी का विकास करना नहीं।
 स्वन्त्रता प्राप्ति के पश्चात भारत में दलितों एवं आदिवासियों की दशा अति दयनीय थी| इसलिए हमारे संविधान निर्माताओं ने काफी सोच समझकर इनके लिए संविधान में आरक्षण की व्यवस्था की और वर्ष 1950 में संविधान के लागू होने के साथ ही सुविधाओं से वंचित वर्गों को आरक्षण की सुविधा मिलने लगी, ताकि देश के संसाधनों, अवसरों एवं शासन प्रणाली में समाज के प्रत्येक समूह की उपस्थिति सुनिश्चित हो सके| उस समय हमारा समाज उच्च-नीच, जाति-पाति, छुआछूत जैसी कुरीतियों से ग्रसित था| 
स्वतंत्रता प्राप्ति के समय से ही भारत में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए सरकारी नौकरियां शिक्षा में आरक्षण लागू है| मंडल आयोग की संस्तुतियों के लागू होने के बाद वर्ष 1993 से ही अन्य पिछड़े वर्गों के लिए नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था कर दी गई| वर्ष 2006 के बाद से केंद्र सरकार के शिक्षण संस्थानों में भी अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण लागू हो गया| इस प्रकार आज समाज का बहुत बड़ा  तबका   आरक्षण की सुविधाओं का लाभ प्राप्त कर रहा  है, लेकिन इस आरक्षण नीति का परिणाम क्या निकला | ये भी सोचने का विषय है क्या ये सविधान में निहित उद्देश्यों को पा सका है। 

4/12/17

उत्तराखण्ड पलायन एक राष्ट्रीय समस्या

कोशिश .....An Effort by Ankush Chauhan
उत्तराखण्ड पलायन एक राष्ट्रीय समस्या 

उत्तराखंड भारत देश का एक छोटा सा राज्य अनेको धार्मिक स्थल सुन्दर मनोहर प्राकतिक दृश्य मगर अपने ही लोगो से वंचित। दशको तक चले आन्दोलन के बाद 9 नवम्बर 2000 को एक नया राज्य अस्तित्व में आया। आंदोलनकरियो और राज्य की आम जनता को लगा उनका बरसो का सपना साकार हो गया। अलग राज्य के बनने के बाद अब विकास की रेलगाडी पहाड़ो की ऊचाईयों तक पहुँच जाएगी। मगर आज 17 साल बाद भी हालत जस के तस है। पलायन आज भी बदस्तूर जारी है। 
उत्तराखंड सरकार  के अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा जारी एक सरकारी आंकड़े के अनुसार जब से नए राज्य का गठन हुआ है तब से लेकर उत्तराखंड के 2 लाख 80 हजार से ज्यादा मकानों पर ताले लग चुके हैं। एक गैर सरकारी संस्था 'पलायन : एक चिंतन’ के द्वारा तैयार किए गए आंकड़ों के अनुसार राज्य बनने के बाद से 16 सालों में 32 लाख लोगों ने पहाड़ से पलायन कर चुके है। सरकार और विपक्षी पार्टियां इस पलायन और विस्थापन पर मौन साधे हुए हैं 

29/11/17

योग को जाने समझे (अष्टांग योग)

कोशिश .....An Effort by Ankush Chauhan
       
                                                  योग को जाने समझे   (अष्टांग योग)

आज सभी लोग योग के नाम से परिचित होगे मगर जब भी योग शब्द का जिक्र आता है तो लोग उसे सिर्फ आसन या शारीरिक व्यायाम तक ही सीमित समझते है। मगर सिर्फ आसन ही योग नही है वो मात्रा योग का एक अंग है। महर्षि पतंजलि के अनुसार योग चित्तवृत्ति का निरोध  है

  " योगश्चितवृत्तिनिरोध:।"

 योगसूत्र के रचनाकार पतञ्जलि हैं। योगसूत्र में चित्त को एकाग्र करके ईश्वर में लीन करने का विधान है। पतंजलि के अनुसार चित्त की वृत्तियों को चंचल होने से रोकना (चित्तवृत्तिनिरोधः) ही योग है। अर्थात मन को इधर उधर भटकने न देना, केवल एक ही वस्तु में स्थिर रखना ही योग है।

28/11/17

What is Yoga ( astang yoga)

कोशिश .....An Effort by Ankush Chauhan

What is Yoga ( astang yoga)

Some time we refer yoga as the ashan or posture or physical exercise. but that asana and physical exercise are only a part of yoga which give strength to our body and makes us  free from many diseases .Maharishi Patanjali define yoga in his yoga shutra as follows

योग: चित्त-वृत्ति निरोध:
yogah citta-vṛtti-nirodhaḥ
 which means "Yoga is the inhibition (nirodhaḥ) of the "waves" or "disturbance" (vṛtti) of the "mind" or "consciousness” or “memory,” (citta)".Swami Vivekananda translates the sutra as "Yoga is restraining the mind-stuff (Citta) from taking various forms (Vrittis)."

In patanjali yoga shutra maharashi patanjali discribe eight limbs of yoga

Eight components or Limbs of yoga

In Patanjali yoga shutra there are eight limbs or aspects of yoga


1. Yamas

Yamas are ethical rules in meny religions like  Hinduism , Buddhism and Jainism and can be thought of as moral imperatives. Maharishi Patanjali listed The five yamas in Patanjali in Yogasutra 
  1. Ahiṃsā (अहिंसा): Nonviolence, non-harming other living beings
  2. Satya (सत्य): truthfulness, non-falsehood
  3. Asteya (अस्तेय): non-stealing
  4. Brahmacārya (ब्रह्मचर्य): chastity, marital fidelity or sexual restraint
  5. Aparigraha (अपरिग्रहः): non-avarice,non-possessiveness
Patanjali,  states how and why each of the above self restraints help in the personal growth of an individual. 

2. Niyama

The second Limbs of Patanjali's Yoga path is called niyama, which includes habits, behaviors  the niyamas are
  1. Saucha: purity, clearness of mind, speech and body
  2. Santoṣa: satisfaction ,contentment, acceptance of others,  optimism for self
  3. Tapas: persistence, perseverance
  4. Svadhyaya: study of Vedas and other knowledgeable books, study of self, self-reflection, introspection of self's thoughts, speeches and actions
  5. Isvarapraṇidhana: contemplation of the Ishvara (God/Supreme Being, True Self)

As with the Yamas, Patanjali explains how and why each of the above Niyamas help in the personal growth of an individual

3. Asana

Patanjali begins discussion of Asana (आसन, posture) by defining it  as follows
स्थिरसुखमासनम् ॥४६॥
 An asana is what is steady and pleasant.
Asana is thus a posture that one can hold for a period of time, staying relaxed, steady, comfortable and motionless. Patanjali does not list any specific asana, except the suggestion, "posture one can hold with comfort and motionlessness".  The posture that causes pain or restlessness is not a yogic posture. Other secondary texts studying Patanjali's sutra state that one requirement of correct posture is to keep breast, neck and head erect (proper spinal posture)
yoga scholars developed, described and commented on numerous postures. Padmasana (lotus), Veerasana (heroic), Bhadrasana (decent)
The Hatha Yoga Pradipika describes the technique of 84 asanas, stating four of these as most important: Padmasana (lotus), Bhadrasana (decent), Sinhasana (lion), and Siddhasana (accomplished).
according to some text lord shiva discribed 84 lakh ashan

4. Praṇayama

Praṇayama is made out of two Sanskrit words praṇa (प्राण, breath)  and ayama (आयाम, restraining, extending, stretching)
After a desired posture has been achieved, the next limb of yoga, praṇayama, which is the practice of consciously regulating breath (inhalation and exhalation) This is done in several ways, inhaling and then suspending exhalation for a period, exhaling and then suspending inhalation for a period, slowing the inhalation and exhalation, consciously changing the time/length of breath (deep, short breathing)

5. Pratyahara

Pratyahara is a combination of two Sanskrit words prati- (the prefix प्रति-, "towards") and ahara (आहार, "bring near")
Pratyahara is bringing near one's awareness and one's thoughts to within. It is a process of withdrawing one's thoughts from external objects, things, person, situation. It is turning one's attention to one's true Self, one's inner world, experiencing and examining self. It is a step of self extraction and abstraction. Pratyahara is not consciously closing one's eyes to the sensory world, it is consciously closing one's mind processes to the sensory world. Pratyahara empowers one to stop being controlled by the external world, and take one's attention to seek self-knowledge and experience the freedom innate in one's inner world

6. Dharaṇa

Dharana (Sanskrit: धारणा) means concentration, introspective focus 
Dharana as the sixth limb of yoga, is holding one's mind onto a particular inner state, subject or topic of one's mind. The mind (not sensory organ) is fixed on a mantra, or one's breath or any part of body, or an object one wants to observe,  Fixing the mind means one-pointed focus, without drifting of mind, and without jumping from one topic to another.

7. Dhyana

Dhyana (Sanskrit: ध्यान) simply known as meditation literally means "profound contemplation"
Dhyana is contemplating, reflecting on whatever Dharana has focused on. If in the sixth limb of yoga one focused on a personal deity, Dhyana is its contemplation. Dhyana is uninterrupted train of thought, current of cognition, flow of awareness.
Dhyana is integrally related to Dharana, one leads to other. Dharana is a state of mind, Dhyana the process of mind. Dhyana is distinct from Dharana in that the meditator becomes actively engaged with its focus. Patanjali defines contemplation (Dhyana) as the mind process, where the mind is fixed on something, and then there is "a course of uniform modification of knowledge".  Dhyana is the yoga state when there is only the "stream of continuous thought about the object, uninterrupted by other thoughts of different kind for the same object"; Dharana, states is focussed on one object, but aware of its many aspects and ideas about the same object. 

8. Samadhi


Samadhi (Sanskrit: समाधि) literally means "putting together, joining, combining with, union, harmonious whole, trance"
Samadhi is oneness with the subject of meditation. There is no distinction, during the eighth limb of yoga, between the actor of meditation, the act of meditation and the subject of meditation. Samadhi is that spiritual state when one's mind is so absorbed in whatever it is contemplating on, that the mind loses the sense of its own identity. The thinker, the thought process and the thought fuse with the subject of thought. There is only oneness, samadhi.

yoga is a group of physicalmental, and spiritual practices or disciplines. Yoga has been studied and may be recommended to promote relaxation, reduce stress and improve some medical conditions . In today's age yoga is adopted as holistic health care. There are many yoga school in India. 
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19/11/17

वीरो के बलिदानों को समझे

वीरो के बलिदानों को समझे

जो  तन   मन  से  हुए  गुलाम ।
वो वीरो के बलिदानों को क्या समझेगे।।
स्वीकार की जिन्होंने दस्ता मुगलो की ।
वो पद्मावती के जौहर को क्या समझेगे।।
चंद रुपियो में बिकने वाले।
शौर्ये और स्वभिमान को क्या समझेगे।।
विरोधी नही किसी नेता और अभिनेता के।
मगर वीरो के बलिदानों का अपमान नही सहेंगे।।
वीरो के लहू से सिंचित ये भारत भूमि।
इस भूमि के वीरो का उपहास नही सहेंगे।।
पुरखो ने तुम्हारे झुकाकर सर अपना सुख बचाया।
वीरो ने कटा कर सर, अपना स्वाभिमान बचाया।।
रक्त शिराओ में हमारी भी बहता है उन वीरो का।
स्वाभिमान की रक्षा को प्राण न्यौछावर से भी नही डरेंगे।।
चंद रुपयों की खातिर जो माँ को भी गली दे देते है।
क्या वो अब हमें इतिहास का पाठ पढ़ाएंगे।।
किताबो के पन्नो की मोहताज नही वीरो की गाथायें।
राष्ट्रभक्तो के रोम रोम में बसी साहस अदम्य की शौर्ये कथाएँ।।
राष्ट्र की खातिर अपने बेटों को कुर्बान करने वाली माताओ की गौरव गाथाएँ।
सत्ता की खातिर अपने बापो को नजरबंद करने वालो के वंसज क्या समझेगे।।
माना के तुमने खूब पसीना बहा एक फ़िल्म बनाने में।
मगर उन वीरो ने अपना रक्त बहा ये राष्ट्र बनाने में।
चंद रुपयों की खातिर घटिया काम ना करो।
वीरो का इस भारत भूमि के तुम अपमान ना करो।

28/10/17

how to make thread on nut and bolt

कोशिश .....An Effort by Ankush Chauhan

Before Understanding threading operations we need to know something about thread , it's type, nomenclature etc.
Thread is a helical groove on a cylindrical surface outside or inside. It is used to make threaded fasteners.
Nomenclature of thread is as following


1. Pitch - it is the distance between two corresponding points on the consecutive thread.

2.Crest- it is the top surface joining the two sides of a thread.

3. Root - The bottom surface joining the two sides of a thread.

4. Depth of Thread - it is the distance measured perpendicular to the axis between Crest and root.

5. Thread angle-  it is the angle between the flanks measured in an axial plant.

6. Flank- it is the surface between the Crest and the root if the thread.

7.Lead- In single start thread lead is the axial advance nut in one complete turn. And is equal to the pitch and in double start thread lead is twice the pitch.

8. Major diameter-  it is also called outside of nominal diameter is the largest diameter of a screw thread.

9. Minor diameter- it is also called root or core diameter. It is smaller diameter external or internal thread.

10. Pitch diameter- it is called effective diameter it is the diameter of an imaginary cylinder, on a cylindrical screw . In a nut and bolt assembly, it is the diameter at which the ridges on the bolt are in complete touch with the ridges of the corresponding nut.

11. Single start thread- when all the thread are built ona single helix it is called single start thread or single thread.

12.Double start thread- whan a thread has two starting point and two equally spaced thread are wrapped with two parallel helices.

13. Multi start thread- when quick advance is required multi thread are used in this two or more then two thread are cut side by side.pitch remain fixed for a particular types of thread.

Types of thread


1. B. S. W ( British Standard Thread) -The BSW basic thread form is a symmetrical V thread in which the angle between the flank , measured in an axial plane, is 55° thread is rounded equally at roots and Crest.

2. B. A. ( British Association) Standard Thread- The basic thread form ia a symmetrical V thread with angle between flank are 47.5°

3. Unified screw thread- This thread system has angle of flank at 60* and on bolt is rounded at Crest and root but in nut rounded off at the root only.

5. American Standard Thread- it is also called seller's thread it used for general purpose. It has flat top and bottom with angle of 60° at flank.

6. Square thread- it is used for power transmission like in screw jacks . It is flat at root and top with flat flank.

7.matric thread- it is basic V thread and defined by nominal size and pitch both expressed in matric ( milimete)

8.ACME Thread- it is the modified form of square thread . It stronger than square thread . It has a 29° thread angle and is flat at top and bottom.

9.Buttress thread- it is used when power is to transmitted in one direction.the force is transmitted almost parallel to the axis and the thread is about the same strength and the standard V thread . Bench vice are usually fitted with spindle having buttress thread.

10. Knuckle thread- it is the modified square thread . It has round top and bottom and can be made on a machine. It is not easily damaged When subjected to rough usage.

How to make thread

There are many process to make thread thread can be made on machine or by hand tools.

1. External thread cutting on lathe- lathe is a conventional machine on which we can cut thread also .watch video


2. External thread cutting by die- die is a hand tool to cut the thread .  it is a tool which is used with a handle to cut the thread.watch  video


3. External thread cutting by rolling-rolling is a thread forming process this is the process in which thread is rolled on the job by a forming tool . watch video


4. Internal thread cutting by tapping-  tap is a hand tool to make internal thread it can be used by a hand with a tap handle on can use by a machine also. Before cutting thread by tap we need to make desired hole by drilling.

-AC

18/10/17

How to select a lathe machine

कोशिश .....An Effort by Ankush Chauhan
How to select a lathe machine

The lathe is one of the oldest machine. In 1797 Henry maudslay , an englishman , designed the first screw cutting lathe. Lathe is a machine  tool which has given shape to our present day civilization by building machine and industry.
The main function of a lathe is to remove material from work piace. Some major operation which can be performed on by a lathe are
1. Straight turning
2.taper turning
3.thread cutting
4. Grooving
5. Facing
6.knurling
7.forming
8.drilling
9.boringh
10.parting off
11.tapping
And many more.
Now how the size of a lathe is defined. The size of a lathe is specified by the following items
1.The swing diameter over bed. This is the largest diameter of work That can revolve without touching the bed.
2. The swing diameter over carriage . This is the largest diameter of work that will revolve over the lathe saddle and always less than the swing diameter over bed.
3. The height of the centres measured from the lathe bed.
4.The length between centers. This is the maximum length of work that can be mounted between the lathe centers.
5. The maximum bore diameter. This is the maximum diameter of bar stock that can be passed though the hole of the headstock spindle.
These are same important measure which we need to know before ordering a lathe machine . And some other parameters are range of spindle speed, number of feeds, number and range of metric and BSW threads that can be cut, pitch of leadscrew and power inputs etc.
Today Different forms of lathe machine are available  some of them are turret lathe, CNC lathe, light duty, medium duty and heavy duty lathe machine. It is important to Selecting a lathe machine according to your requirements to get the best results. For example, if your requirements are more and you need a fast and efficient machine for bulk applications, then a robust heavy duty lathe machine will be a good choice rather than going for a standard light duty lathe which is comparatively cheaper than the machine specifically designed for the bulk or heavy operations. A heavy duty lathe machine for metal shaping is usually equipped with high speed, automated functionalities and technologically advanced features and therefore can give better performance with faster and efficient work for longer period of time than the machine designed for light or medium duty applications.

watch Lathe machine working.

https://www.youtube.com/watch?v=gZ8Srt2pe4U


Traub machine is a cam operated machine which can perform many operation of lathe machine. It is a automatic type of machine in which tool movement are set by setting of different cams as per required job after setting, machine perform automatic. It has very less cost to CNC and can give good production rate in comparison to ordinary lathe.

watch traub machine working.

https://www.youtube.com/watch?v=zNZOadmmtjM



A CNC lathe is a computer controlled machine which is good for both small as well as large scale industries. If you required a completely automated machine for accurate metal then go for CNC lathe machine. A CNC lathe machine works with computerized programs and therefore is a good choice for those who want to reduce the labor costs at the workplace. As these are computer controlled machinery one need expert technician to program it.

https://www.youtube.com/watch?v=iK-15h5PP7k




-AC


17/10/17

Importance of festivals

कोशिश .....An Effort by Ankush Chauhan
importance of festivals

भारत एक ऐसा देश है जिसे अगर हम  त्यौहार का  देश कहे तो ये अतिशयोक्ति नही होगी। क्योकि यहाँ हर दिन कही ना कही, कोई न कोई त्योहार होता ही है जीवन की व्यस्तता के कारण हम मनोरंजन और खुशियो के लिये भी समय नही निकाल पाते। ये त्यौहार हमारे जीवन मे सुखद परिवर्तन लाते है तथा हमारे जीवन में हर्षोल्लास और नवीनता का संचार करते है। हर त्यौहार में कुछ परम्पराए और कुछ समाजिक मान्यताए होती है । हर समुदाय, जाति और धर्म की अपनी मान्यताए होती है उसी के आधार पर वो अपने त्योहारों को मानते है। इन त्यौहारों में परम्परा और मान्यता के साथ समाज और देश के लिये कोई न कोई संदेश भी होता है और यही इनकी सबसे बड़ी खूबसूरती होती है। जैसे भारत मे विजयदशमी को असत्य पर सत्य की जीत का और बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व माना जाता है और यही इसका सामाजिक संदेश है। उसी प्रकार रक्षाबंधन भाई बहन के पवित्र प्रेम और भाई का बहन को आजीवन रक्षा करने का वचन  इसका सामाजिक संदेश है। इसी प्रकार होली हमे एकरूपता और शत्रु से भी प्रेम करने का संदेश देता है।क्रिसमस संसार से पाप और अंधकार को दूर करने का सन्देश देता है। ईद आपसी भाईचारे का संदेश देता है। हर त्यौहार के पीछे कोई न कोई सामाजिक उद्देश्य होता है। जो उन त्योहारों की वास्तविक सुंदरता है। और ये समाज के ताने बाने को मजबूत करते है।
हर त्यौहार का कुछ न कुछ विधि विधान होता है उनमें काफी वैज्ञनिकता भी है हो सकता है इन्ही वैज्ञनिक महत्व को देखते हुए हमारे पूर्वजों ने त्यौहार और रीतिरिवाजों के द्वारा ये महत्व अपनी अगली पीढ़ी तक पहुचाने का प्रयास किया हो। 
दीपावली से पहले सभी घरों में साफ सफाई और रंगाई पुताई होती है और आज विज्ञान भी इसके महत्व को नकार नही सकता के बरसात के बाद घरों में नमी और गंदगी होती है और गंदगी और मक्खी मच्छर बीमारियो का कारण बन सकते है और दीवाली से पहले की ये सफाई कितनी उपयोगी होती है। 
हर पुजा पाठ में तुलसी को महत्वपूर्ण स्थान मिला है और शास्त्रों में हर घर मे तुलसी का पौधा लगाने के लिए कहा गया है रोज सवेरे तुलसी को जल देना और पूजा अर्चना करने का विधान है और वैज्ञनिक शोधों में पाया गया है कि मानव शरीर के लिए तुलसी का पौधा अनेक प्रकार से लाभदायक है। यह हवा को शुद्ध करने में सहायक है और अनेक रोगों में भी इसके पत्ते, इसके बीज लाभकारी सिद्ध होते हैं। आयुर्वेदिक डॉक्टर भी तुलसी को जड़ी बूटी मानकर दवाओं में प्रयोग करते हैं। 
साथ ही प्रतिदिन सवेरे सूर्य को जल अर्पित करने को हमारे धर्म ग्रंथों में महत्वपूर्ण बताया गया है। सूर्योदय के समय जो किरणें हमारे शरीर पर पड़ती हैं वह स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती हैं। इसलिए हमारे पूर्वजों ने रोज सवेरे स्नानादि से निवृत्त होकर सूर्योदय के समय में जल अर्पण करने का प्रावधान किया है।
ऐसे ही विभिन्न त्यौहारों पर उपवास का महत्व है यदि हम उपवासों पर दृष्टि डालें तो उपवासों का उद्देश्य मानव शरीर को स्वस्थ रखना प्रतीत होता है सारी शारीरिक समस्याओं की जड़ पेट होता है अर्थात यदि पेट की पाचन क्रिया दुरुस्त है तो शरीर व्याधि रहित रहता है। उसे ठीक रखने के लिए समय-समय पर उपवास करना सर्वोत्तम माना गया है, फिर चाहे उपवास रोजे के रूप में हो या फिर नवरात्री के रूप में। अगर हम नवरात्रो के उपवास के समय पर गौर करे तो पता चलेगा के ये मौसम परिवर्तन के समय आते है जिसमे एक शर्दियों के आगमन पर और एक गर्मियों के आगमन पर जो हमारे पेट को उपवास के माध्य्म से उस ऋतु परिवर्तन के अनुकूल बनाते है।
पूजा पाठ के दौरान होने वाले हवन का भी विशेष महत्व है वैज्ञानिक शोधों से सिद्ध हो चुके हैं के जब हवन का आयोजन होता है तो उसमें हवन कुंड में देसी घी, कपूर, हवन सामग्री तथा आम की लकड़ी प्रज्वलित की जाती है। इन वस्तुओं के प्रज्वलन से शुद्ध ऑक्सिजन  प्राप्त होती है, जो हमारे स्वास्थ्य रक्षा और रोगों के निदान के लिए महत्वपूर्ण होता है हवन से वायु शुद्ध होती है इससे वातावरण में व्याप्त जीवाणु और विषाणु नष्ट हो जाते हैं साथ ही हम संक्रमण से बचते हैं। 
पूजा पाठ में वैदिक मन्त्रों का जाप भी महत्वपूर्ण माना गया है मन्त्र का उद्देश्य मन को केंद्रित कर उसे अनेक बुराइयों से बचाना होता है और इससे शारीरिक ऊर्जा का विकास होता है। इस विषय पर शोध करने के पश्चात पाया गया कि मन्त्र के उच्चारण से उत्पन्न ध्वनि तरंगें अनुकूल प्रभाव डालती हैं। अतः इस मन्त्र का वैज्ञानिक महत्त्व चमत्कारिक है। इसके लगातार उच्चारण करने से शारीरिक ऊर्जा के साथ-साथ जप के स्थान पर भी ऊर्जा का संचार पाया गया है।
नदियों में सिक्के डालने के पीछे भी रहस्य छिपा हुआ है। प्राचीन काल में सिक्के तांबे के होते थे, जिन्हें नदी में डालने से नदी के जल को शुद्ध करने में सहायता मिलती थी। यद्यपि यह परंपरा आज अप्रासंगिक हो गयी है क्योंकि सिक्के अब तांबे के नही होते तो ऐसी परम्परों को आज त्याग देना चाहिये। और साथ ही अन्य गंदगी भी धर्म के नाम पर नदियों में नही डालनी चाहिए क्योंकि ये धर्म की वैज्ञनिकता को कंलकित करती है।
त्यौहार पारिवारिक और सामाजिक एकता में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं । त्यौहार का आनंद और भी अधिक होता है जब परिवार के सभी सदस्य एक साथ त्योहारों में हिस्सा लेते हैं । परिवार के सदस्यों का त्योहार के शुभ अवसर पर एकत्र होने से कार्य की व्यस्तता के कारण जो संवादहीनता या परस्पर दुराव उत्पन्न होता है वह समाप्त हो जाता है । संवेदनाओं व परस्पर मेल आदि से मानवीय भावनाएँ पुनर्जीवित हो उठती हैं । इसके अतिरिक्त पारिवारिक संस्कार आदि का बच्चों पर उत्तम प्रभाव पड़ता है ।
अतः हम कह सकते है के ये त्यौहार परिवार , समाज और राष्ट्र के निर्माण और एकता के लिये महत्वपूर्ण है। तो त्योहारों को मिलजुलकर मनाये और खुशियों को बटकर खुशियो को बढ़ाये।

11/10/17

pollution and politics

कोशिश .....An Effort by Ankush Chauhan
ban on crackers, right or wrong

प्रदूषण बड़े शहरों में एक बहुत बडी समस्याओं में एक है इसमें कोई दोराय नही। और पटाखे भी प्रदूषण फैलाते है ये भी सही है वो वायु और ध्वनि दोनों प्रकार का प्रदूषण करते है ये सही है मगर क्या वो सिर्फ कुछ निर्धारित कालखण्ड में ही प्रदूषण करते है अगर नही तो क्यो न उन्हें हमेशा के लिये बैन कर दिया जाये। और क्यो न पूरे देश मे बंद कर दिया जाय। और साथ ही सबसे ज्यादा प्रदूषण तो ये वाहन करते है तो क्यो हम इन वाहनों खासकर डीजल गाड़ियों पर प्रतिबंध लगाने की हिम्मत नहीं कर पा रहे। 
                                   

अगर बहस प्रदूषण पर है तो होनी भी चाहिये और सभी देश के सभी नागरिकों को इसका स्वागत भी करना चाहिय। क्योकि दिल्ली जैसे शहरों में तो सांस लेना भी भारी है। एक अकड़े के अनुसार दिल्ली विश्व के सबसे ज्यादा प्रदूषण वाले शहरों में से एक है और ये बड़े दूरभाग्य का विषय है के हमारे देश की राजधानी की ये हालात है सुख सुविधओं और मनोरंजन की लालसाओं ने ये स्तिथि पैदा कर दी के आज हम दो कदम के लिये भी गाड़ी लेकर चलते है। मगर एक सच ये भी है के  कोई भी सुविधा या मनोरंजन जीवन से ज्यादा जरूरी नही। और प्रदूषण तो एक बड़ी समस्या है और जिसके बहुत से और भी बड़े कारण है और अगर हम प्रदूषण को लेकर इतना ही सज़ग है तो क्यो नही प्रदूषण के अन्य कारणों पर सख्त कदम उठा पा रहे। क्यो फैक्टरियों से निकलने वाले धुँए पर कोई लगाम लगा पा रहे। 

क्या हम देश हित मे सड़को पर गडियो की संख्या कम करने के लिये कोई सख्त कानून नही  बना सकते। जैसे हर कम्पनी या आफिस को अपने एम्प्लॉय के लिये बस या वेन कंपलसरी कर देनी चाहिए जिससे सब अपनी अपनी गडियो को सड़क पर न लाकर एक कॉमन व्हीकल से आये। साथ ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट को भी इतना मजबूत किया जाय के लोगो को इसके इस्तेमाल में सुविधा हो। कूड़े के लगे पहाड़, ये भी तो प्रदूषण करते है इनके निस्तारण का कोई सख्त तरीका क्यो नही लागू किया जाता। 

और हम अति होने पर ही क्यो जागते है जहाँ प्रदूषण की अति हो गयी बस वहाँ अनान फानन में कुछ आदेश दे दो देश को लगे कुछ काम हो रहा है। देश के बाकी हिस्से जहाँ अभी स्तिथि नियंत्रण में है वहाँ भी अभी से कुछ कार्येवाहि क्यो नही करते या वहाँ अभी स्थित के बिगड़ने के इंतजार कर रहे है ? नदियों नालो की स्तिथि तो इतनी बुरी हो चुकी है की कही भी पानी पीने लायक नही। और इसी का फायदा ये बड़ी बड़ी कंपनिया उठा रही है और सड़कों 20-30 रुपये की पानी बोतल और घरों में अपने RO बेच कर मोटा मुनाफा कमा रही है। 

मगर सरकारे नदियों नालो में गिरने वाले नालो पर क्यों कोई सख्त कार्येवाहि नही कर पाती और न ही कोई समाधान निकाल पाती। देश हित की चर्चाओ को धार्मिक रंग मिलान चिन्ता का विषय है मगर इसकी जिम्मेदार सिर्फ जनता है ऐसा नही। वो फैसले भी है जो जनता के मन मे संदेह पैदा करते है साथ ही देश की तुष्टिकरण की राजनीति सबसे ज्यादा जिम्मेदार है। और देश मे धर्म और जातियो के राजनीतिक ठेकेदार सबसे ज्यादा जिम्मेदार है। जिनके कारण  हर मुद्दे पर चर्चा धर्म और जाति तक सिमट कर रह जाती है। अगर कही महिलाओ के शोषण और अधिकारों की बात होती है चाहे मंदिर पे प्रवेश हो या तीन तलाक़ हम हर मुद्दे में हालत यही हैं। आज देश की विडंबना ही यही है कि यहाँ असल मुद्दों पर कभी चर्चा हो ही नही पाती और राजनीति हमेशा हर मुद्दे पर हावी हो जाती है और शायद कभी निष्पक्षता से कोई फैसले भी नही होते। अभी हाल ही के पटाखे बैन के मुद्दे पर ही अगर फैसला हमेशा के लिये पटाखे बैन का होता और फैसला भी एक दो महीने पहले होता तो शायद इतना विवाद न होता क्योंकि कुछ दिनों के बैन से तो लोगो का पूछना लाज़मी है के क्या बाकी समय पटाखे ऑक्सीजन देते है । ये तो हमेशा ही नुकसानदायक है तो क्यो ना उन्हें हमेशा के लिये बैन कर दिया जाय। और वो भी पूरे देश मे, साथ ही डीजल गाड़िया भी बंद कर दी जाए पूरे देश मे ताकि जिन शहरों में अभी स्तिथि सही है वहाँ सही बानी रहे। और जनता को भी कुछ निर्णय खुद लेने चाहिय के उनके लिये क्या ज्यादा महत्वपूर्ण है मनोरंजन , सुविधा या आने वाली पीढ़ी का जीवन। तो सोच समझ कर गाड़ी , एयरकंडीशनर  आदि का इस्तेमाल करे 
प्रदूषण के आकड़ो की रिपोर्ट पर्टिकुलेट मैटर 2.5(पीएम) के आधार पर बनाई है। पीएम हवा में फैले सूक्ष्म खतरनाक कण हैं जो हमारे फेफड़ों में भी प्रवेश कर जाते हैं। 2.5 माइक्रोग्राम से छोटे इन कणों को पर्टिकुलेट मैटर 2.5 या पीएम 2.5 कहा जाता है। प्रत्येक क्यूबिक मीटर हवा में पीएम 2.5 कणों का स्तर जानकर प्रदूषण का आकलन किया जाता है। 1.4 करोड़ से अधिक की जनसंख्या वाले चयनित मेगा शहरों के नमूने में नई दिल्ली सबसे प्रदूषित है।
 दिल्ली सरकार पार्को के रखरखाव पर सालाना करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद सूरत व सीरत नहीं बदली। आलम यह है कि जिन पार्को में लोगों को सैर सपाटे करना चाहिए, वहां गाड़ियों की पार्किंग हो रही है तो कहीं पूरा पार्क ही वीरान पड़ा है। खास बात यह कि देल्ही के कुछ पार्को में तो  पौधों को पानी देने का भी कोई साधन नहीं है।

उद्यान विभाग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक नगर निगम पश्चिमी जोन में 2700 पार्क हैं। इसमें से करीब 1500 पार्क उजड़ चुके हैं। वहीं कागजों में जो 1200 विकसित पार्क हैं, उनमें से 415 पार्को में पंप ही नहीं लगे हैं। फिर कैसे पार्को में लगे पौधों की सिंचाई की जा सकती है।जानकारी के मुताबिक पश्चिमी जोन में पार्को के रखरखाव पर करीब 8.50 करोड़ रुपये खर्च किए गए। बावजूद इसके इसका असर कहीं नजर नहीं आता। और यही हाल बाकी जोन का भी है । सरकार हर साल करोड़ो रुपए खर्च करके कोशिश करती है कि दिल्ली को हर भरा रखा जाए जिससे प्रदूषण में कुछ कटौती की जा सके लेकिन ये सिर्फ कागजों पे ही योजनाएं बनती है और खत्म हो जाती है, सरकार यदि चाहे तो इसके चौथाई खर्च में पूरे दिल्ली के प्रदूषण पे नियंत्रण कर सकती है ।
जिससे प्रदूषण नियंत्रण किया जा सकता है -- 
वायु प्रदूषण को रोकने के लिए अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाने चाहिए  शायद इसी कारण लोग अपने घरों के अंदर भी पेड़ लगा रहे हैं।
 एक अध्ययन के अनुसार यह पता लगा कि घर की हवा को ताजा करने के लिए पौधे बेस्ट होते हैं। घर के अंदर की हवा में काफी मात्रा में बेंजीन, ट्राइक्लोरोथिलीन, अमोनिया जैसे कई तरह के नुकसान देने वाले रसायन होते हैं। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि घर के अंदर बढ़ते वायु-प्रदूषण को कम करने में पौधे हथियार के रूप में काम करते हैं। कुछ पौधे ऐसे होते हैं कि हमारे घरों, सार्वजनिक स्थलों और कार्यालयों के अंदर की हानिकारक गैसों को 85% तक अपने अंदर समा लेते हैं।ये पौधे सिर्फ़ हानिकारक गैसों से निपटारा ही नहीं करते, बल्कि घरों को सुंदर भी बनाते हैं। अच्छी सेहत और साफ हवा के लिए अपने घरों में पौधे को ज़रूर लगाएं।यदि दिल्ली सरकार चाहे तो सड़को के किनारे और पार्कों में ज्यादा से ज्यादा लगा सकती है और 60 से 85% तक एयर पॉल्युशन कम कर सकती है ।।
इस दीपावली कम से कम 5 पौधे खरीदे 3 अपने घर के लिए और 2 अपने आसपास के पार्क के लिए जरूरी नही की हर बार सरकार की तरफ ही देखा जाए जरूरत है खुद इस लड़ाई में हिस्सा लेकर अपने बच्चो के भविष्य के लिए कुछ करे , हाथ पे हाथ रख के बैठने से कुछ नही होने वाला । ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाए उन्हें बचाये। और पर्यावरण संरक्षण में अपना सहयोग दे।